भभुआ प्रखंड के सिकठी गांव से सामने आई एक हृदय विदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। गांव निवासी शिवम पटेल की निर्मम हत्या कर उसका शव खेत में फेंके जाने की सूचना सामने आई है। इस घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर गहरा आक्रोश और शोक का माहौल देखा गया।
परिजनों का आरोप है कि शिवम के लापता होने के बाद वे लगातार दो दिनों तक थाने के चक्कर लगाते रहे, लेकिन पुलिस द्वारा उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते पुलिस सक्रियता दिखाती, तो शायद इस घटना को टाला जा सकता था और शिवम की जान बचाई जा सकती थी। शव बरामद होने के बाद पुलिस प्रशासन की सक्रियता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए विकास सिंह जी ने राज्य की कानून-व्यवस्था और तथाकथित सुशासन पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जब परिजन न्याय की गुहार लगा रहे थे, तब प्रशासन की उदासीनता चिंताजनक रही। उनका कहना है कि ऐसी घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि आम नागरिक की सुरक्षा को लेकर प्रशासन कितना संवेदनशील है।
विकास सिंह ने सवाल किया कि जिस सुशासन के नाम पर जनता ने जनादेश दिया, क्या उसमें पीड़ित परिवारों की समय पर सुनवाई शामिल नहीं है? उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में पुलिस की जिम्मेदारी केवल घटना के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि समय रहते संभावित अपराध को रोकना भी है।
फिलहाल पुलिस द्वारा मामले की जांच किए जाने की बात कही जा रही है और दोषियों की तलाश जारी है। वहीं, स्थानीय लोगों की मांग है कि इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो और यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाए।
ईश्वर दिवंगत शिवम पटेल की आत्मा को शांति प्रदान करे। यह घटना एक बार फिर कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक संवेदनशीलता और जवाबदेही पर गंभीर विमर्श की आवश्यकता को रेखांकित करती है।